गणेश चतुर्थी 2026: 18 सितंबर पांचवें [5] दिन की पूजा विधि, भोग, मंत्र, आरती और विसर्जन

गणेश चतुर्थी 2026: 18 सितंबर पांचवें दिन की पूजा विधि, भोग, मंत्र, आरती और विसर्जन



गणेश चतुर्थी 2026: गणपति बप्पा की आराधना का पर्व भक्तों के लिए श्रद्धा, भक्ति और आनंद का अवसर है। 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को गणेशोत्सव का पांचवां दिन है। इस दिन भगवान श्री गणेश की विधि-विधान से पूजा, भोग, मंत्र जाप और आरती करने की परंपरा है।

यदि आपके घर या सार्वजनिक पंडाल में गणपति विराजमान हैं, तो पांचवें दिन सुबह या अपनी परंपरा के अनुसार भगवान गणेश की पूजा करके उन्हें सात्त्विक भोग अर्पित करें और परिवार के साथ आरती करें।

🪔 18 सितंबर 2026: मुख्य जानकारी

  • दिन: शुक्रवार
  • अवसर: गणेश चतुर्थी उत्सव का पांचवां दिन
  • देवता: भगवान श्री गणेश
  • मुख्य पूजा: गणेश पूजन, मंत्र जाप और आरती
  • भोग: मोदक, लड्डू, फल और अन्य सात्त्विक प्रसाद
  • विसर्जन: अपने परिवार/मंडल की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार

🙏 पांचवें दिन गणपति की पूजा कैसे करें?

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को साफ करें। गणपति बप्पा की प्रतिमा के सामने दीपक और धूप जलाएं। सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और मन में श्रद्धा के साथ पूजा का संकल्प लें।

  1. भगवान गणेश को प्रणाम करके पूजा प्रारंभ करें।
  2. गंगाजल या शुद्ध जल से प्रतीकात्मक रूप से शुद्धि करें।
  3. गणपति को अक्षत, पुष्प और दूर्वा अर्पित करें।
  4. चंदन और कुमकुम अर्पित करें।
  5. मोदक या पसंदीदा सात्त्विक भोग चढ़ाएं।
  6. भगवान गणेश के मंत्र का जाप करें।
  7. गणेश जी की आरती करें।
  8. अंत में सभी परिवारजनों में प्रसाद वितरित करें।

🌺 भगवान गणेश को कौन सा भोग लगाएं?

गणपति पूजा में मोदक को विशेष रूप से प्रिय नैवेद्य माना जाता है। पांचवें दिन आप अपनी श्रद्धा और उपलब्धता के अनुसार निम्न सात्त्विक प्रसाद अर्पित कर सकते हैं:

  • 🍥 मोदक
  • 🍬 बेसन या बूंदी के लड्डू
  • 🍌 केला और अन्य मौसमी फल
  • 🥥 नारियल
  • 🍚 खीर या अन्य घर का बना सात्त्विक प्रसाद
  • 🌿 दूर्वा और लाल पुष्प

भोग बनाते समय स्वच्छता रखें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रसाद तैयार करें।

🕉️ गणेश जी का सरल मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः॥

श्रद्धा के अनुसार इस मंत्र का जाप करें और भगवान गणेश से बुद्धि, विवेक, सुख-शांति तथा मंगल की प्रार्थना करें।

🌿 दूर्वा और पुष्प अर्पित करने की परंपरा

गणेश पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त भगवान गणेश को दूर्वा और लाल पुष्प श्रद्धा से अर्पित करते हैं। पूजा सामग्री उपलब्ध न होने पर अपनी क्षमता और स्थानीय परंपरा के अनुसार सरल पूजा भी की जा सकती है।

🪔 गणपति बप्पा की आरती

पूजा के अंत में परिवार के सभी सदस्य मिलकर भगवान गणेश की आरती करें। आरती के दौरान दीपक दिखाएं और श्रद्धापूर्वक गणपति बप्पा का स्मरण करें।

गणपति बप्पा मोरया! मंगल मूर्ति मोरया!

आरती के बाद भगवान गणेश को प्रणाम करें और परिवार की सुख-शांति एवं मंगल की प्रार्थना करें।

🌸 पांचवें दिन क्या विशेष प्रार्थना करें?

गणपति बप्पा के सामने अपनी मनोकामना रखने के साथ-साथ परिवार, समाज और सभी प्राणियों के सुख एवं कल्याण की प्रार्थना करना भी भक्तिभाव का सुंदर माध्यम है।

🙏 प्रार्थना:
हे गणपति बप्पा, हमारे जीवन से विघ्न दूर करें, हमें सद्बुद्धि और विवेक प्रदान करें तथा हमारे परिवार में सुख, शांति और मंगल बनाए रखें।

🪔 गणेश विसर्जन के बारे में जरूरी बात

गणपति विसर्जन की तिथि और शुभ समय स्थान, पंचांग तथा स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए विसर्जन से पहले अपने क्षेत्र के विश्वसनीय स्थानीय पंचांग या पुरोहित से 18 सितंबर 2026 के लिए लागू विसर्जन मुहूर्त की पुष्टि करें।

विसर्जन के समय भगवान गणेश की उत्तर पूजा करके उन्हें श्रद्धापूर्वक विदाई दें और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन व्यवस्था का पालन करें।

❓ गणेश चतुर्थी 2026 से जुड़े सामान्य प्रश्न

1. 18 सितंबर 2026 को गणेशोत्सव का कौन सा दिन है?

18 सितंबर 2026, शुक्रवार को यहां वर्णित गणेशोत्सव का पांचवां दिन माना गया है।

2. पांचवें दिन गणपति को क्या भोग लगाएं?

मोदक, लड्डू, फल, नारियल, खीर और अन्य सात्त्विक घर का बना प्रसाद श्रद्धा से अर्पित किया जा सकता है।

3. गणेश जी का कौन सा मंत्र जाप करें?

ॐ गं गणपतये नमः॥ भगवान गणेश का सरल और प्रचलित मंत्र है।

4. गणपति विसर्जन का सही समय कैसे जानें?

विसर्जन मुहूर्त स्थानीय स्थान और पंचांग के अनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए। इसलिए अपने क्षेत्र के विश्वसनीय पंचांग से समय की पुष्टि करें।

5. क्या घर पर गणपति की पूजा सरल तरीके से कर सकते हैं?

हां। स्वच्छता, श्रद्धा और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार दीपक, पुष्प, दूर्वा, नैवेद्य, मंत्र जाप और आरती के साथ सरल पूजा की जा सकती है।

🌺 गणपति बप्पा मोरया

गणेश चतुर्थी केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि परिवार के साथ भक्ति, सकारात्मकता और सद्भावना से जुड़ने का अवसर भी है। पांचवें दिन गणपति बप्पा की श्रद्धापूर्वक पूजा करें, सात्त्विक भोग लगाएं और आरती के बाद प्रसाद सभी के साथ बांटें।

गणपति बप्पा मोरया! 🙏🌺


📌 Disclaimer: पूजा-विधि और मुहूर्त से संबंधित जानकारी सामान्य धार्मिक परंपराओं पर आधारित है। तिथि और मुहूर्त स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। किसी विशेष अनुष्ठान या विसर्जन के लिए स्थानीय पंचांग/विद्वान की सलाह लें।

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