गणेश चतुर्थी 2026: पांचवें दिन की पूजा विधि, भोग, मंत्र, आरती और विसर्जन मुहूर्त

गणेश चतुर्थी 2026 5वें दिन पूजा विधि और विसर्जन मुहूर्त

गणेश चतुर्थी 2026 का पावन पर्व भक्तिभाव और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। जिन भक्तों ने 14 सितंबर 2026 को गणपति बप्पा की स्थापना की है और पांचवें दिन यानी 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को गणपति विसर्जन करने वाले हैं, उनके लिए यह दिन विशेष श्रद्धा का होता है।

पांचवें दिन गणपति बप्पा की पूजा, नैवेद्य, आरती और उत्तर पूजा करने के बाद विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है। इस दिन भक्त भगवान गणेश से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और सभी विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।

🌺 18 सितंबर 2026 को गणपति पूजा कैसे करें?

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें और गणपति बप्पा के सामने दीपक प्रज्वलित करें। इसके बाद गणपति जी को चंदन, रोली, अक्षत, दूर्वा, लाल फूल, धूप और दीप अर्पित करें।

गणपति जी का ध्यान करते हुए श्रद्धापूर्वक इस मंत्र का जाप करें:

ॐ गं गणपतये नमः।

इसके बाद गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार गणेश मंत्र का जाप किया जा सकता है।

🪔 गणपति बप्पा को पांचवें दिन कौन-सा भोग लगाएं?

गणेश जी को मोदक विशेष प्रिय माना जाता है। पांचवें दिन आप घर में बनाए हुए सात्त्विक प्रसाद का भोग लगा सकते हैं। भोग में शामिल कर सकते हैं:

  • 🥮 मोदक
  • 🍚 मखाने की खीर
  • 🍯 तिल-गुड़ के लड्डू
  • 🍌 केले और अन्य फल
  • 🥥 नारियल

भोग लगाते समय मन में श्रद्धा रखें और प्रार्थना करें:
"हे गणपति बप्पा! श्रद्धापूर्वक अर्पित इस नैवेद्य को स्वीकार करें और हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें।"

🙏 विसर्जन से पहले जरूर करें 'उत्तर पूजा'

गणपति विसर्जन से पहले गणपति बप्पा की अंतिम पूजा करें। इसे कई परंपराओं में उत्तर पूजा कहा जाता है। गणपति जी को फूल, दूर्वा, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें। परिवार के सभी सदस्य भगवान गणेश से अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगें।

🕐 18 सितंबर 2026 विसर्जन मुहूर्त और नियम

पांचवें दिन गणपति विसर्जन करने वाले भक्त पूजा के बाद बप्पा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाते हैं। विसर्जन का शुभ समय स्थान और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के चौघड़िया या स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम मुहूर्त अवश्य जांचें।

विसर्जन के दौरान भक्त जयघोष करते हैं:

गणपति बप्पा मोरया!
मंगल मूर्ति मोरया!
अगले बरस तू जल्दी आ!

नोट: पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की प्रतिमा का उपयोग करें और विसर्जन के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षित स्थान और नियमों का पालन करें।

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