गणेश चतुर्थी 2026 (आठवां दिन): गणपति को लगाएं यह खास भोग, खुशियों से भर जाएगी झोली!

 

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गणेश चतुर्थी 2026 (आठवां दिन): गणपति को लगाएं यह खास भोग, जानें मंत्र और आरती विधि

गणेशोत्सव के आठवें दिन (अष्टमी) प्रथम पूज्य श्री गणेश को लगाएं उनका सबसे प्रिय भोग। जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती का सरल पाठ।


गणेशोत्सव 2026: आठवें दिन (अष्टमी) का विशेष महत्व

गणेश उत्सव का आठवां दिन बेहद ही पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस दिन भक्त भगवान श्री गणेश को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि आठवें दिन गणपति बप्पा की निष्ठापूर्वक पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट, विघ्न और दरिद्रता दूर होती है।

आठवें दिन गणपति बप्पा को कौन सा भोग लगाएं?

गणेश चतुर्थी के आठवें दिन भगवान गणेश को केसर और मावा (खोया) मोदक या मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि आप पारंपरिक रूप से भोग बनाना चाहते हैं, तो उकडीचे मोदक (स्टीम्ड मोदक) सर्वोत्तम विकल्प है।

भोग सामग्री सूची:

  • मुख्य भोग: मावा मोदक / बेसन के लड्डू / मोतीचूर लड्डू
  • फल: केला, जामुन और सेब
  • अन्य सामग्री: ताजी दूर्वा (21 गांठें), नारियल और पान का पत्ता

विशेष टिप: गणपति बप्पा को भोग लगाते समय उसमें 21 दूर्वा (घास) और तुलसी के पत्ते (अलग से रखकर, केवल गणेश जी को अर्पण हेतु) या शमी पत्र अवश्य शामिल करें। ध्यान रखें कि गणेश जी को तुलसी दल सीधे स्पर्श न कराएं, बल्कि भोग के पास रखें।

गणेश पूजा के सिद्ध मंत्र (Ganesh Mantra)

भोग लगाते समय और आरती से पूर्व नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करने से बप्पा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है:

1. संकट दूर करने का मूल मंत्र:

ॐ गं गणपतये नमः॥

2. मनोकामना पूर्ति मंत्र:

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

3. गणेश गायत्री मंत्र:

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥

जय गणेश जय गणेश देवा - श्री गणेश जी की आरती

भोग अर्पण करने के बाद धूप-दीप जलाकर भक्तिभाव से आरती करें:

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

एक दन्त दयावन्त, चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी॥
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करे सेवा॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

अन्धन को आंख देत, कोढिन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥

आठवें दिन की पूजा विधि (Step-by-Step)

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो लाल या पीले रंग के) धारण करें।
  2. गणपति जी की प्रतिमा को गंगाजल और आचमन से स्वच्छ करें।
  3. बप्पा को रोली, अक्षत, चंदन और लाल पुष्प (गुड़हल) अर्पित करें।
  4. 21 दूर्वा की गांठें गणेश जी के मस्तक पर चढ़ाएं।
  5. तैयार किया गया मावा मोदक या मोतीचूर लड्डू का भोग लगाएं।
  6. मंत्रों का जाप करें और तत्पश्चात कपूर या घी के दीपक से आरती उतारें।
  7. अंत में प्रसाद सभी परिजनों और भक्तों में वितरित करें।

निष्कर्ष: गणेश चतुर्थी के आठवें दिन बप्पा की सच्चे मन से सेवा करने पर घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। गणपति बप्पा मोरया!

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